बहु प्रकार सीतहि समुझाएहु

चौपाई ६, दोहा २३ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

बहु प्रकार सीतहि समुझाएहु। कहि बल बिरह बेगि तुम्ह आएहु॥ हनुमत जन्म सुफल करि माना। चलेउ हृदयँ धरि कृपानिधाना॥ ६ ॥

अर्थ

बहुत प्रकार से सीता को समझाना और मेरा बल तथा विरह कहकर तुम शीघ्र लौट आना। हनुमानजी ने अपना जन्म सफल समझा और कृपानिधान प्रभु को हृदय में धारण करके वे चले।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “सुग्रीव-राम संवाद और वानरों का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा २३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुग्रीव-राम संवाद और सीताजी की खोज हेतु वानर दलों का चारों दिशाओं में प्रस्थान का वर्णन है।

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सुग्रीव-राम संवाद और वानरों का प्रस्थान