जद्यपि प्रभु जानत सब बाता
जद्यपि प्रभु जानत सब बाता
चौपाई ७, दोहा २३ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
जद्यपि प्रभु जानत सब बाता। राजनीति राखत सुरत्राता॥ ७ ॥
अर्थ
यद्यपि देवताओं की रक्षा करने वाले प्रभु सब बात जानते हैं, तो भी वे राजनीति की रक्षा कर रहे हैं। (नीति की मर्यादा रखने के लिये सीता जी का पता लगाने को जहाँ-तहाँ वानरों को भेज रहे हैं)।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “सुग्रीव-राम संवाद और वानरों का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ७, दोहा २३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुग्रीव-राम संवाद और सीताजी की खोज हेतु वानर दलों का चारों दिशाओं में प्रस्थान का वर्णन है।
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सुग्रीव-राम संवाद और वानरों का प्रस्थान