अति सभीत कह सुनु हनुमाना

चौपाई २, दोहा १ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

अति सभीत कह सुनु हनुमाना। पुरुष जुगल बल रूप निधाना॥ धरि बटु रूप देखु तैं जाई। कहेसु जानि जियँ सयन बुझाई॥ २ ॥

अर्थ

सुग्रीव अत्यन्त भयभीत होकर बोले-हे हनुमान्! सुनो, ये दोनों पुरुष बल और रूप के निधान हैं। तुम ब्रह्मचारी का रूप धारण करके जाकर देखो। अपने हृदय में उनकी यथार्थ बात जानकर मुझे इशारे से समझाकर कह देना।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “हनुमानजी-राम मिलन और राम-सुग्रीव मित्रता” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी और श्रीराम के मिलन तथा अग्नि को साक्षी मानकर राम-सुग्रीव की पवित्र मित्रता स्थापित होने का वर्णन है।

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हनुमानजी-राम मिलन और राम-सुग्रीव मित्रता