आगें चले बहुरि रघुराया
आगें चले बहुरि रघुराया
चौपाई १, दोहा १ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
आगें चले बहुरि रघुराया। रिष्यमूक पर्बत निअराया॥ तहँ रह सचिव सहित सुग्रीवा। आवत देखि अतुल बल सींवा॥ १ ॥
अर्थ
श्रीरघुनाथजी फिर आगे चले। ऋष्यमूक पर्वत निकट आ गया। वहाँ मन्त्रियों सहित सुग्रीव रहते थे। अतुलनीय बल की सीमा श्रीरामचन्द्रजी और श्रीलक्ष्मणजी को आते देखकर--।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “हनुमानजी-राम मिलन और राम-सुग्रीव मित्रता” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी और श्रीराम के मिलन तथा अग्नि को साक्षी मानकर राम-सुग्रीव की पवित्र मित्रता स्थापित होने का वर्णन है।
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हनुमानजी-राम मिलन और राम-सुग्रीव मित्रता