कह बाली सुनु भीरु प्रिय समदरसी
कह बाली सुनु भीरु प्रिय समदरसी
दोहा ७ · किष्किन्धाकाण्ड
दोहा पाठ
कह बाली सुनु भीरु प्रिय समदरसी रघुनाथ। जौं कदाचि मोहि मारहिं तौ पुनि होउँ सनाथ॥ ७ ॥
अर्थ
बालि ने कहा-हे भीरु! (डरपोक) प्रिये! सुनो, श्रीरघुनाथजी समदर्शी हैं। जो कदाचित् वे मुझे मारेंगे ही तो मैं सनाथ हो जाऊँगा (परमपद पा जाऊँगा)।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “सुग्रीव का वैराग्य” प्रकरण का दोहा ७ है। इस प्रकरण में सुग्रीव के वैराग्य और प्रभु-शरण के संकल्प का जागरण का वर्णन है।
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सुग्रीव का वैराग्य