अर्ध राति पुर द्वार पुकारा

चौपाई २, दोहा ६ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

अर्ध राति पुर द्वार पुकारा। बाली रिपु बल सहइ न पारा॥ धावा बालि देखि सो भागा। मैं पुनि गयउँ बंधु सँग लागा॥ २ ॥

अर्थ

उसने आधी रात को नगर के द्वार पर आकर पुकारा (ललकारा)। बालि शत्रु के बल को सह नहीं सका। वह दौड़ा, उसे देखकर वह भागा। मैं भी फिर भाई के साथ लग गया।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “सुग्रीव का दुःख और बालि वध की प्रतिज्ञा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुग्रीव का दुःख-संवाद, बालि वध की प्रतिज्ञा और सच्चे मित्र के लक्षणों पर श्रीराम का उपदेश का वर्णन है।

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सुग्रीव का दुःख और बालि वध की प्रतिज्ञा