कहइ रीछपति सुनु हनुमाना

चौपाई २, दोहा ३० के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

कहइ रीछपति सुनु हनुमाना। का चुप साधि रहेहु बलवाना॥ पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना॥ २ ॥

अर्थ

ऋक्षराज जाम्बवान् ने श्रीहनुमान् जी से कहा-हे हनुमान्! हे बलवान्! सुनो, तुमने यह क्या चुप साध रखी है? तुम पवन के पुत्र हो और बल में पवन के समान हो। तुम बुद्धि-विवेक और विज्ञान की खान हो।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “जांबवंत का हनुमानजी को उत्साहित करना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जांबवंत द्वारा हनुमानजी को उनका अपार बल और सामर्थ्य याद दिलाकर समुद्र लांघने के लिए प्रेरित करने का वर्णन है।

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जांबवंत का हनुमानजी को उत्साहित करना