अब प्रभु कृपा करहु एहि भाँती
अब प्रभु कृपा करहु एहि भाँती
चौपाई ११, दोहा ७ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
अब प्रभु कृपा करहु एहि भाँती। सब तजि भजनु करौं दिन राती॥ सुनि बिराग संजुत कपि बानी। बोले बिहँसि रामु धनुपानी॥ ११ ॥
अर्थ
हे प्रभो! अब तो इस प्रकार कृपा कीजिए कि सब छोड़कर दिन-रात मैं आपका भजन ही करूँ। सुग्रीव की वैराग्ययुक्त वाणी सुनकर (उसके क्षणिक वैराग्य को देखकर) हाथ में धनुष धारण करनेवाले श्रीरामजी मुसकराकर बोले--।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “सुग्रीव का वैराग्य” प्रकरण का चौपाई ११, दोहा ७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुग्रीव के वैराग्य और प्रभु-शरण के संकल्प का जागरण का वर्णन है।
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सुग्रीव का वैराग्य