उपरोहित जेवनार बनाई
उपरोहित जेवनार बनाई
चौपाई १, दोहा १७३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
उपरोहित जेवनार बनाई। छरस चारि बिधि जसि श्रुति गाई॥ मायामय तेहिं कीन्हि रसोई। बिंजन बहु गनि सकइ न कोई॥ १ ॥
अर्थ
पुरोहित ने छः रस और चार प्रकार के भोजन, जैसा कि वेदों में वर्णन है, बनाये। उसने मायामयी रसोई तैयार की और इतने व्यंजन बनाये जिन्हें कोई गिन नहीं सकता।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १७३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।
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प्रतापभानु की कथा