तुम्ह माया भगवान सिव सकल जगत
तुम्ह माया भगवान सिव सकल जगत
दोहा ८१ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
तुम्ह माया भगवान सिव सकल जगत पितु मातु। नाइ चरन सिर मुनि चले पुनि पुनि हरषत गातु॥ ८१ ॥
अर्थ
आप माया हैं और शिवजी भगवान् हैं। आप दोनों समस्त जगत के माता-पिता हैं। [यह कहकर ] मुनि पार्वतीजी के चरणों में सिर नवाकर चल दिये। उनके शरीर बार-बार पुलकित हो रहे थे।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वती” प्रकरण का दोहा ८१ है। इस प्रकरण में सप्तर्षियों द्वारा पार्वतीजी की निष्ठा-परीक्षा और उनकी अडिग भक्ति एवं महिमा का वर्णन है।
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सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वती