मैं पा परउँ कहइ जगदंबा
मैं पा परउँ कहइ जगदंबा
चौपाई ४, दोहा ८१ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
मैं पा परउँ कहइ जगदंबा। तुम्ह गृह गवनहु भयउ बिलंबा॥ देखि प्रेमु बोले मुनि ग्यानी। जय जय जगदंबिके भवानी॥ ४ ॥
अर्थ
जगदंबा पार्वतीजी ने फिर कहा कि मैं आपके पैरों पड़ती हूँ। आप अपने घर जाइये, बहुत देर हो गयी। [शिवजी में पार्वतीजी का ऐसा] प्रेम देखकर ज्ञानी मुनि बोले-- हे जगदंबिके! हे भवानी! आपकी जय हो! जय हो!!
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वती” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ८१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सप्तर्षियों द्वारा पार्वतीजी की निष्ठा-परीक्षा और उनकी अडिग भक्ति एवं महिमा का वर्णन है।
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सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वती