तेहि सन जागबलिक पुनि पावा
तेहि सन जागबलिक पुनि पावा
चौपाई ३, दोहा ३० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
तेहि सन जागबलिक पुनि पावा। तिन्ह पुनि भरद्वाज प्रति गावा॥ ते श्रोता बकता समसीला। सवँदरसी जानहिं हरिलीला॥ ३ ॥
अर्थ
उन काकभुशुण्डिजी से फिर याज्ञवल्क्यजी ने पाया और उन्होंने फिर उसे भरद्वाजजी को गाकर सुनाया। वे दोनों वक्ता और श्रोता (याज्ञवल्क्य और भरद्वाज) समान शीलवाले और समदर्शा हैं और श्रीहरि की लीला को जानते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के गुण, चरित्र और रामकथा की पवित्रता एवं मुक्तिदायक महिमा का वर्णन है।
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श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा