जानहिं तीनि काल निज ग्याना

चौपाई ४, दोहा ३० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

जानहिं तीनि काल निज ग्याना। करतल गत आमलक समाना॥ औरउ जे हरिभगत सुजाना। कहहिं सुनहिं समुझहिं बिधि नाना॥ ४ ॥

अर्थ

वे अपने ज्ञान से तीनों कालों की बातों को हथेली पर रखे हुए आँवले के समान (प्रत्यक्ष) जानते हैं। और भी जो सुजान (भगवान्‌ की लीलाओं का रहस्य जाननेवाले) हरिभक्त हैं, वे इस चरित्र को नाना प्रकार से कहते, सुनते और समझते हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के गुण, चरित्र और रामकथा की पवित्रता एवं मुक्तिदायक महिमा का वर्णन है।

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श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा