तेहि अवसर जो जेहि बिधि आवा
तेहि अवसर जो जेहि बिधि आवा
चौपाई ४, दोहा १९६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
तेहि अवसर जो जेहि बिधि आवा। दीन्ह भूप जो जेहि मन भावा॥ गज रथ तुरग हेम गो हीरा। दीन्हे नृप नानाबिधि चीरा॥ ४ ॥
अर्थ
उस अवसर पर जो जिस प्रकार आया और जिसके मन को जो अच्छा लगा, राजा ने उसे वही दिया। हाथी, रथ, घोड़े, सोना, गौएँ, हीरे और भाँति-भाँति के वस्त्र राजा ने दिये।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १९६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के मंगलमय प्राकट्य और आनंदमयी बाललीलाओं का वर्णन है।
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श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला