परमानंद प्रेम सुख फूले
परमानंद प्रेम सुख फूले
चौपाई ३, दोहा १९६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
परमानंद प्रेम सुख फूले। बीथिन्ह फिरहिं मगन मन भूले॥ यह सुभ चरित जान पै सोई। कृपा राम कै जापर होई॥ ३ ॥
अर्थ
परमानन्द और प्रेम-सुख में फूले हुए हम दोनों मगन मन से (मस्त हुए) गलियों में [तन-मन की सुधि] भूले हुए फिरते थे। परन्तु यह शुभ चरित्र वही जान सकता है, जिस पर श्रीराम की कृपा हो।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १९६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के मंगलमय प्राकट्य और आनंदमयी बाललीलाओं का वर्णन है।
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श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला