तेहि आश्रमहिं मदन जब गयऊ
तेहि आश्रमहिं मदन जब गयऊ
चौपाई १, दोहा १२६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
तेहि आश्रमहिं मदन जब गयऊ। निज मायाँ बसंत निरमयऊ॥ कुसुमित बिबिध बिटप बहुरंगा। कूजहिं कोकिल गुंजहिं भृंगा॥ १ ॥
अर्थ
जब कामदेव उस आश्रम में गया, तब उसने अपनी माया से वहाँ वसंत-ऋतु को उत्पन्न किया। तरह-तरह के वृक्षों पर रंग-बिरंगे फूल खिल गये, उन पर कोयलें कूकने लगीं और भौंरे गुंजार करने लगे।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीरामावतार के हेतु” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १२६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीरामावतार के कारणों और रावण-कुम्भकर्ण के जन्म के हेतु का वर्णन है।
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श्रीरामावतार के हेतु