चली सुहावनि त्रिबिध बयारी
चली सुहावनि त्रिबिध बयारी
चौपाई २, दोहा १२६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
चली सुहावनि त्रिबिध बयारी। काम कृसानु बढ़ावनिहारी॥ रंभादिक सुरनारि नबीना। सकल असमसर कला प्रबीना॥ २ ॥
अर्थ
कामाग्नि को भड़काने वाली तीन प्रकार की (शीतल, मन्द और सुगन्ध) सुहावनी हवा चलने लगी। रम्भा आदि नवयुवती देवांगनाएँ, जो सभी काम-कला में निपुण थीं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीरामावतार के हेतु” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १२६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीरामावतार के कारणों और रावण-कुम्भकर्ण के जन्म के हेतु का वर्णन है।
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श्रीरामावतार के हेतु