तारकु असुर भयउ तेहि काला
तारकु असुर भयउ तेहि काला
चौपाई ३, दोहा ८२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
तारकु असुर भयउ तेहि काला। भुज प्रताप बल तेज बिसाला॥ तेहिं सब लोक लोकपति जीते। भए देव सुख संपति रीते॥ ३ ॥
अर्थ
उसी समय तारक नाम का असुर हुआ, जिसकी भुजाओं का बल, प्रताप और तेज बहुत बड़ा था। उसने सब लोक और लोकपालों को जीत लिया, सब देवता सुख और सम्पत्ति से रहित हो गये।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वती” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ८२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सप्तर्षियों द्वारा पार्वतीजी की निष्ठा-परीक्षा और उनकी अडिग भक्ति एवं महिमा का वर्णन है।
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सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वती