भए मगन सिव सुनत सनेहा
भए मगन सिव सुनत सनेहा
चौपाई २, दोहा ८२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
भए मगन सिव सुनत सनेहा। हरषि सप्तरिषि गवने गेहा॥ मनु थिर करि तब संभु सुजाना। लगे करन रघुनायक ध्याना॥ २ ॥
अर्थ
पार्वतीजी का प्रेम सुनते ही शिवजी आनन्दमग्न हो गये। सप्तर्षि प्रसन्न होकर अपने घर (ब्रह्मलोक) को चले गये। तब सुजान शिवजी मन को स्थिर करके श्रीरघुनाथजी का ध्यान करने लगे।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वती” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ८२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सप्तर्षियों द्वारा पार्वतीजी की निष्ठा-परीक्षा और उनकी अडिग भक्ति एवं महिमा का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वती