तब सिय देखि भूप अभिलाषे
तब सिय देखि भूप अभिलाषे
चौपाई १, दोहा २६६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
तब सिय देखि भूप अभिलाषे। कूर कपूत मूढ़ मन माखे॥ उठि उठि पहिरि सनाह अभागे। जहँ तहँ गाल बजावन लागे॥ १ ॥
अर्थ
उस समय सीताजी को देखकर कुछ राजा लोग ललचा उठे। वे दुष्ट, कुपूत और मूढ़ राजा मन में बहुत तमतमा गये। वे अभागे उठ-उठकर कवच पहनकर जहाँ-तहाँ गाल बजाने लगे।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “जयमाल पहनाना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २६६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में धनुषभंग के बाद सीता द्वारा श्रीराम को जयमाल अर्पण और देवताओं की पुष्पवर्षा का वर्णन है।
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जयमाल पहनाना