लेहु छड़ाइ सीय कह कोऊ
लेहु छड़ाइ सीय कह कोऊ
चौपाई २, दोहा २६६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
लेहु छड़ाइ सीय कह कोऊ। धरि बाँधहु नृप बालक दोऊ॥ तोरें धनुषु चाड़ नहिं सरई। जीवत हमहि कुअँरि को बरई॥ २ ॥
अर्थ
कोई कहते हैं, सीता को छीन लो और दोनों राजकुमारों को पकड़कर बाँध लो। धनुष तोड़ने से ही चाह नहीं सरेगी (पूरी होगी)। हमारे जीते-जी राजकुमारी को कौन ब्याह सकता है ?
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “जयमाल पहनाना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २६६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में धनुषभंग के बाद सीता द्वारा श्रीराम को जयमाल अर्पण और देवताओं की पुष्पवर्षा का वर्णन है।
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जयमाल पहनाना