तब मन हरषि बचन कह राऊ
तब मन हरषि बचन कह राऊ
चौपाई ४, दोहा २०७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
तब मन हरषि बचन कह राऊ। मुनि अस कृपा न कीन्हिहु काऊ॥ केहि कारन आगमन तुम्हारा। कहहु सो करत न लावउँ बारा॥ ४ ॥
अर्थ
तब राजा ने मन में हर्षित होकर ये वचन कहे—हे मुनि! इस प्रकार की कृपा तो आपने कभी नहीं की। आपके आगमन का क्या कारण है? कहिये, मैं उसे पूरा करने में देर नहीं लगाऊँगा।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र का राम-लक्ष्मण माँगना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २०७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विश्वामित्र द्वारा यज्ञ-रक्षा हेतु राम-लक्ष्मण को माँगने और दशरथ द्वारा वशिष्ठ की सम्मति से उन्हें भेजने का वर्णन है।
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विश्वामित्र का राम-लक्ष्मण माँगना