असुर समूह सतावहिं मोही
असुर समूह सतावहिं मोही
चौपाई ५, दोहा २०७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
असुर समूह सतावहिं मोही। मैं जाचन आयउँ नृप तोही॥ अनुज समेत देहु रघुनाथा। निसिचर बध मैं होब सनाथा॥ ५ ॥
अर्थ
राक्षसों के समूह मुझे बहुत सताते हैं। मैं तुमसे माँगने आया हूँ, हे नृप! छोटे भाई सहित रघुनाथ को दे दो। राक्षसों के वध के बाद मैं सनाथ हो जाऊँगा।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र का राम-लक्ष्मण माँगना” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा २०७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विश्वामित्र द्वारा यज्ञ-रक्षा हेतु राम-लक्ष्मण को माँगने और दशरथ द्वारा वशिष्ठ की सम्मति से उन्हें भेजने का वर्णन है।
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विश्वामित्र का राम-लक्ष्मण माँगना