तब बिदेह बोले कर जोरी

चौपाई ४, दोहा ३४० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

तब बिदेह बोले कर जोरी। बचन सनेह सुधाँ जनु बोरी॥ करौं कवन बिधि बिनय बनाई। महाराज मोहि दीन्हि बड़ाई॥ ४ ॥

अर्थ

तब जनकजी हाथ जोड़कर मानो स्नेह रूपी अमृत में डुबोकर वचन बोले--मैं किस तरह बनाकर (किन शब्दों में) विनती करूँ। हे महाराज ! आपने मुझे बड़ी बड़ाई दी है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३४० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।

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बारात का अयोध्या लौटना