पुनि कह भूपति बचन सुहाए
पुनि कह भूपति बचन सुहाए
चौपाई ३, दोहा ३४० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
पुनि कह भूपति बचन सुहाए। फिरिअ महीस दूरि बड़ि आए॥ राउ बहोरि उतरि भए ठाढ़े। प्रेम प्रबाह बिलोचन बाढ़े॥ ३ ॥
अर्थ
दशरथजी ने फिर सुहावने वचन कहे--हे राजन् ! बहुत दूर आ गये, अब लौटिये। फिर राजा दशरथजी रथ से उतरकर खड़े हो गये। उनके नेत्रों में प्रेम का प्रवाह बढ़ आया (प्रेमाश्रुओं की धारा बह चली)।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३४० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना