स्याम सरीरु सुभायँ सुहावन

चौपाई १, दोहा ३२७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

स्याम सरीरु सुभायँ सुहावन। सोभा कोटि मनोज लजावन॥ जावक जुत पद कमल सुहाए। मुनि मन मधुप रहत जिन्ह छाए॥ १ ॥

अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी का साँवला शरीर स्वभाव से ही सुन्दर है। उसकी शोभा करोड़ों कामदेवों को लजानेवाली है। महावर से युक्त चरणकमल बड़े सुहावने लगते हैं, जिन पर मुनियों के मनरूपी भौरे सदा छाये रहते हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३२७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।

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श्रीसीता-राम विवाह