पीत पुनीत मनोहर धोती

चौपाई २, दोहा ३२७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

पीत पुनीत मनोहर धोती। हरति बाल रबि दामिनि जोती॥ कल किंकिनि कटि सूत्र मनोहर। बाहु बिसाल बिभूषन सुंदर॥ २ ॥

अर्थ

पवित्र और मनोहर पीली धोती प्रातःकाल के सूर्य और बिजली की ज्योति को हरे लेती है। कमर में सुन्दर किंकिणी और कटिसूत्र हैं। विशाल भुजाओं में सुन्दर आभूषण सुशोभित हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३२७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।

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श्रीसीता-राम विवाह