सुतन्ह समेत दसरथहि देखी

चौपाई २, दोहा ३०९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सुतन्ह समेत दसरथहि देखी। मुदित नगर नर नारि बिसेषी॥ सुमन बरिसि सुर हनहिं निसाना। नाकनटीं नाचहिं करि गाना॥ २ ॥

अर्थ

पुत्रों सहित दशरथजी को देखकर नगर के स्त्री-पुरुष बहुत ही प्रसन्न हो रहे हैं। [आकाश में] देवता फूलों की वर्षा करके नगाड़े बजा रहे हैं और अप्सराएँ गा-गाकर नाच रही हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३०९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।

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बारात का जनकपुर में स्वागत