रामहि देखि बरात जुड़ानी
रामहि देखि बरात जुड़ानी
चौपाई १, दोहा ३०९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
रामहि देखि बरात जुड़ानी। प्रीति कि रीति न जाति बखानी॥ नृप समीप सोहहिं सुत चारी। जनु धन धरमादिक तनुधारी॥ १ ॥
अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी को देखकर बारात शीतल हुई (राम के वियोग में सबके हृदय में जो आग जल रही थी, वह शान्त हो गयी)। प्रीति की रीति का बखान नहीं हो सकता। राजा के पास चारों पुत्र ऐसी शोभा पा रहे हैं मानो अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष शरीर धारण किये हुए हों।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३०९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
बारात का जनकपुर में स्वागत