अकथ अलौकिक तीरथराऊ
अकथ अलौकिक तीरथराऊ
चौपाई ७, दोहा २ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
अकथ अलौकिक तीरथराऊ। देइ सद्य फल प्रगट प्रभाऊ॥ ७ ॥
अर्थ
वह तीर्थरज अलौकिक और अकथनीय है, एवं तत्काल फल देनेवाला है; उसका प्रभाव प्रत्यक्ष है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “गुरु वन्दना” प्रकरण का चौपाई ७, दोहा २ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गुरु-चरण-वन्दना और उनकी कृपा से अज्ञान-नाश तथा रामकथा-बोध का वर्णन है।
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गुरु वन्दना