सुनासीर मन महुँ असि त्रासा
सुनासीर मन महुँ असि त्रासा
चौपाई ४, दोहा १२५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनासीर मन महुँ असि त्रासा। चहत देवरिषि मम पुर बासा॥ जे कामी लोलुप जग माहीं। कुटिल काक इव सबहि डेराहीं॥ ४ ॥
अर्थ
इन्द्र के मन में यह डर हुआ कि देवर्षि नारद मेरी पुरी (अमरावती) का निवास चाहते हैं। जगत् में जो कामी और लोभी होते हैं, वे कुटिल कौए की तरह सबसे डरते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीरामावतार के हेतु” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १२५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीरामावतार के कारणों और रावण-कुम्भकर्ण के जन्म के हेतु का वर्णन है।
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श्रीरामावतार के हेतु