सुनहु सकल रजनीचर जूथा
सुनहु सकल रजनीचर जूथा
चौपाई ३, दोहा १८१ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनहु सकल रजनीचर जूथा। हमरे बैरी बिबुध बरूथा॥ ते सनमुख नहिं करहिं लराई। देखि सबल रिपु जाहिं पराई॥ ३ ॥
अर्थ
हे समस्त राक्षसों के दलो! सुनो, देवतागण हमारे शत्रु हैं। वे सामने आकर युद्ध नहीं करते। बलवान् शत्रु को देखकर भाग जाते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १८१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण, कुंभकर्ण आदि के जन्म, तपस्या से प्राप्त ऐश्वर्य और तीनों लोकों पर अत्याचार का वर्णन है।
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रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार