सोह सैल गिरिजा गृह आएँ

चौपाई २, दोहा ६६ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सोह सैल गिरिजा गृह आएँ। जिमि जनु रामभगति के पाएँ॥ नित नूतन मंगल गृह तासू। ब्रह्मादिक गावहिं जसु जासू॥ २ ॥

अर्थ

पार्वतीजी के घर आ जाने से पर्वत ऐसा शोभायमान हो रहा है जैसा रामभक्ति को पाकर भक्त शोभायमान होता है। उस (पर्वतराज) के घर नित्य नये-नये मंगल होते हैं, जिसका ब्रह्मादि यश गाते हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “पार्वती का जन्म और तपस्या” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ६६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती के पार्वती रूप में जन्म और शिव-प्राप्ति हेतु कठोर तपस्या का वर्णन है।

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पार्वती का जन्म और तपस्या