सो फलु मोहि बिधाताँ दीन्हा
सो फलु मोहि बिधाताँ दीन्हा
चौपाई २, दोहा ५९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सो फलु मोहि बिधाताँ दीन्हा। जो कछु उचित रहा सोइ कीन्हा॥ अब बिधि अस बूझिअ नहिं तोही। संकर बिमुख जिआवसि मोही॥ २ ॥
अर्थ
उसका फल विधाता ने मुझको दिया, जो उचित था वही किया; परन्तु हे विधाता! अब तुझे यह उचित नहीं है कि शंकर से विमुख होने पर भी मुझे जिला रहा है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिवजी द्वारा सती का त्याग” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ५९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिवजी द्वारा सती को त्यागने और गहन समाधि में लीन होने का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
शिवजी द्वारा सती का त्याग