सीय चकित चित रामहि चाहा

चौपाई ४, दोहा २४८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सीय चकित चित रामहि चाहा। भए मोहबस सब नरनाहा॥ मुनि समीप देखे दोउ भाई। लगे ललकि लोचन निधि पाई॥ ४ ॥

अर्थ

सीताजी चकित चित्त से श्रीरामजी को देखने लगीं, तब सब राजालोग मोह के वश हो गये। सीताजी ने मुनि के पास [बैठे हुए] दोनों भाइयों को देखा तो उनके नेत्र अपना खजाना पाकर ललचाकर वहीं (श्रीरामजी में) जा लगे (स्थिर हो गये)।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीसीताजी का यज्ञशाला में प्रवेश” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २४८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का सखियों सहित यज्ञशाला में प्रवेश और उनके अलौकिक सौंदर्य से सभी के मोहित होने का वर्णन है।

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श्रीसीताजी का यज्ञशाला में प्रवेश