सीय बिआहबि राम गरब दूरि करि

सोरठा २४५ · बालकाण्ड

सोरठा पाठ

सीय बिआहबि राम गरब दूरि करि नृपन्ह के। जीति को सक संग्राम दसरथ के रन बाँकुरे॥ २४५ ॥

अर्थ

[उन्होंने कहा--] राजाओं के गर्व दूर करके (जो धनुष किसी से नहीं टूट सकेगा उसे तोड़कर) श्रीरामचन्द्रजी सीताजी को ब्याहेंगे। [रही युद्ध की बात, सो] महाराज दशरथ के रण में बाँके पुत्रों को युद्ध में जीत ही कौन सकता है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश” प्रकरण का सोरठा २४५ है। इस प्रकरण में विश्वामित्र के साथ यज्ञशाला में श्रीराम-लक्ष्मण के प्रवेश और सभा के विविध भावमय दर्शन का वर्णन है।

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विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश