एक बार कालउ किन होऊ
एक बार कालउ किन होऊ
चौपाई ४, दोहा २४५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
एक बार कालउ किन होऊ। सिय हित समर जितब हम सोऊ॥ यह सुनि अवर महिप मुसुकाने। धरमसील हरिभगत सयाने॥ ४ ॥
अर्थ
काल ही क्यों न हो, एक बार तो सीता के लिये उसे भी हम युद्ध में जीत लेंगे। यह घमण्ड की बात सुनकर दूसरे राजा, जो धर्मात्मा, हरिभक्त और सयाने थे, मुसकराये।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २४५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विश्वामित्र के साथ यज्ञशाला में श्रीराम-लक्ष्मण के प्रवेश और सभा के विविध भावमय दर्शन का वर्णन है।
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विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश