सीय स्वयंबरु देखिअ जाई
सीय स्वयंबरु देखिअ जाई
चौपाई १, दोहा २४० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सीय स्वयंबरु देखिअ जाई। ईसु काहि धौं देइ बड़ाई॥ लखन कहा जस भाजनु सोई। नाथ कृपा तव जापर होई॥ १ ॥
अर्थ
चलकर सीताजी के स्वयंवर को देखना चाहिये। देखें ईश्वर किसको बड़ाई देते हैं। लक्ष्मणजी ने कहा-हे नाथ! जिस पर आपकी कृपा होगी, वही बड़ाई का पात्र होगा (धनुष तोड़ने का श्रेय उसी को प्राप्त होगा)।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २४० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का पार्वती पूजन, वरदान-प्राप्ति और राम-लक्ष्मण के मधुर संवाद का वर्णन है।
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सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद