सीताराम गुणग्राम पुण्यारण्य विहारिणौ

श्लोक ४ · बालकाण्ड

श्लोक पाठ

सीतारामगुणग्रामपुण्यारण्यविहारिणौ। वन्दे विशुद्धविज्ञानौ कवीश्वरकपी श्वरौ॥ ४ ॥

अर्थ

श्रीसीतारामजीके गुणसमूहरूपी पवित्र वनमें विहार करनेवाले, विशुद्ध विज्ञानसम्पन्न कवीश्वर श्रीवाल्मीकिजी और कपीश्वर श्रीहनुमानजीकी मैं वन्दना करता हूँ।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मंगलाचरण” प्रकरण का श्लोक ४ है। इस प्रकरण में तुलसीदास द्वारा सरस्वती, गणेश, भवानी-शंकर, गुरु और श्रीराम की वंदना एवं दिव्य कृपा की याचना का वर्णन है।

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मंगलाचरण