सेवत तोहि सुलभ फल चारी
सेवत तोहि सुलभ फल चारी
चौपाई १, दोहा २३६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सेवत तोहि सुलभ फल चारी। बरदायनी पुरारि पिआरी॥ देबि पूजि पद कमल तुम्हारे। सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे॥ १ ॥
अर्थ
हे [भक्तों को मुँहमाँगा] वर देनेवाली! हे त्रिपुर के शत्रु शिवजी की प्रिय पत्नी! आपकी सेवा करने से चारों फल सुलभ हो जाते हैं। हे देवि! आपके चरणकमलों की पूजा करके देवता, मनुष्य और मुनि सभी सुखी हो जाते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २३६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का पार्वती पूजन, वरदान-प्राप्ति और राम-लक्ष्मण के मधुर संवाद का वर्णन है।
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सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद