ससि ललाट सुंदर सिर गंगा

चौपाई २, दोहा ९२ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

ससि ललाट सुंदर सिर गंगा। नयन तीनि उपबीत भुजंगा॥ गरल कंठ उर नर सिर माला। असिव बेष सिवधाम कृपाला॥ २ ॥

अर्थ

शिवजी के सुन्दर मस्तक पर चन्द्रमा, सिर पर गंगा, तीन नेत्र, साँपों का जनेऊ, गले में विष और छाती पर नरमुंडों की माला थी। इस प्रकार उनका वेष अशुभ होने पर भी वे कल्याण के धाम और कृपालु हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “देवताओं की प्रार्थना, सप्तर्षि पार्वती के पास” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ९२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवताओं की शिव से विवाह-प्रार्थना और सप्तर्षियों के पार्वती के पास जाने का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
देवताओं की प्रार्थना, सप्तर्षि पार्वती के पास