ससि कर सम सुनि गिरा तुम्हारी
ससि कर सम सुनि गिरा तुम्हारी
चौपाई १, दोहा १२० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
ससि कर सम सुनि गिरा तुम्हारी। मिटा मोह सरदातप भारी॥ तुम्ह कृपाल सबु संसउ हरेऊ। राम स्वरूप जानि मोहि परेऊ॥ १ ॥
अर्थ
आपकी चन्द्रमा की किरणों के समान शीतल वाणी सुनकर मेरा अज्ञानरूपी शरद् ऋतु (क्वार) की धूप का भारी ताप मिट गया। हे कृपालु! आपने मेरा सब सन्देह हर लिया, अब श्रीरामचन्द्रजी का यथार्थ स्वरूप मेरी समझ में आ गया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १२० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।
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शिव-पार्वती संवाद