सर्बस दान दीन्ह सब काहू

चौपाई ४, दोहा १९४ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सर्बस दान दीन्ह सब काहू। जेहिं पावा राखा नहिं ताहू॥ मृगमद चंदन कुंकुम कीचा। मची सकल बीथिन्ह बिच बीचा॥ ४ ॥

अर्थ

राजा ने सभी को भरपूर दान दिया। जिसने पाया उसने भी नहीं रखा (लुटा दिया)। [नगर की] सभी गलियों के बीच-बीच में मृगमद, चंदन और कुंकुम की कीच मच गई।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १९४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के मंगलमय प्राकट्य और आनंदमयी बाललीलाओं का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला