करि आरति नेवछावरि करहीं

चौपाई ३, दोहा १९४ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

करि आरति नेवछावरि करहीं। बार बार सिसु चरनन्हि परहीं॥ मागध सूत बंदिगन गायक। पावन गुन गावहिं रघुनायक॥ ३ ॥

अर्थ

वे आरती करके नेवछावर करती हैं और बार-बार बच्चे के चरणों पर गिरती हैं। मागध, सूत, बंदिगन और गायक रघुनायक के पावन गुण गाते हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १९४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के मंगलमय प्राकट्य और आनंदमयी बाललीलाओं का वर्णन है।

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श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला