संबत मध्य नास तव होऊ
संबत मध्य नास तव होऊ
चौपाई २, दोहा १७४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
संबत मध्य नास तव होऊ। जलदाता न रहिहि कुल कोऊ॥ नृप सुनि श्राप बिकल अति त्रासा। भै बहोरि बर गिरा अकासा॥ २ ॥
अर्थ
एक वर्ष के भीतर तेरा नाश हो जाय, तेरे कुल में कोई पानी देने वाला तक न रहेगा। शाप सुनकर राजा भय के मारे अत्यन्त व्याकुल हो गया। फिर सुन्दर आकाशवाणी हुई--
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १७४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।
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प्रतापभानु की कथा