संभु सरासनु काहुँ न टारा
संभु सरासनु काहुँ न टारा
चौपाई ३, दोहा २९२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
संभु सरासनु काहुँ न टारा। हारे सकल बीर बरिआरा॥ तीनि लोक महँ जे भटमानी। सभ कै सकति संभु धनु भानी॥ ३ ॥
अर्थ
परन्तु शिवजी के धनुष को कोई भी नहीं हटा सका। सारे बलवान वीर हार गये। तीनों लोकों में जो वीरता के अभिमानी थे, शिवजी के धनुष ने सबकी शक्ति तोड़ दी।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २९२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।
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जनक का दूत, बारात का प्रस्थान