सकल सौच करि जाइ नहाए

चौपाई १, दोहा २२७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सकल सौच करि जाइ नहाए। नित्य निबाहि मुनिहि सिर नाए॥ समय जानि गुर आयसु पाई। लेन प्रसून चले दोउ भाई॥ १ ॥

अर्थ

सब शौच करके वे जाकर नहाये। नित्यकर्म निभाकर मुनि को सिर नवाया। समय जानकर, गुरु की आज्ञा पाकर दोनों भाई फूल लेने चले।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २२७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में पुष्पवाटिका में श्रीसीताराम का परस्पर प्रथम दर्शन और मिलन का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन