सकल बरात जनक सनमानी

चौपाई ३, दोहा ३२१ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सकल बरात जनक सनमानी। दान मान बिनती बर बानी॥ बिधि हरि हरु दिसिपति दिनराऊ। जे जानहिं रघुबीर प्रभाऊ॥ ३ ॥

अर्थ

राजा जनक ने दान, मान-सम्मान, विनय और उत्तम वाणी से सारी बारात का सम्मान किया। ब्रह्मा, विष्णु, शिव, दिक्पाल और सूर्य जो श्रीरघुबीरजी का प्रभाव जानते हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३२१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।

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बारात का जनकपुर में स्वागत