कपट बिप्र बर बेष बनाएँ

चौपाई ४, दोहा ३२१ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

कपट बिप्र बर बेष बनाएँ। कौतुक देखहिं अति सचु पाएँ॥ पूजे जनक देव सम जानें। दिए सुआसन बिनु पहिचानें॥ ४ ॥

अर्थ

वे कपट से ब्राह्मणों का सुन्दर वेष बनाए बहुत ही सुख पाते हुए सब लीला देख रहे थे। जनकजी ने उनको देवताओं के समान जानकर उनका पूजन किया और बिना पहचाने भी उन्हें सुन्दर आसन दिए।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३२१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।

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बारात का जनकपुर में स्वागत