सैल सुलच्छन सुता तुम्हारी
सैल सुलच्छन सुता तुम्हारी
चौपाई ४, दोहा ६७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सैल सुलच्छन सुता तुम्हारी। सुनहु जे अब अवगुन दुइ चारी॥ अगुन अमान मातु पितु हीना। उदासीन सब संसय छीना॥ ४ ॥
अर्थ
हे पर्वतराज! तुम्हारी कन्या सुलक्षणी है। अब इसमें जो दो-चार अवगुण हैं, उन्हें भी सुन लो। अगुण, अमान, माता-पिता हीना, उदासीन, सब संशय छीना।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “पार्वती का जन्म और तपस्या” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ६७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती के पार्वती रूप में जन्म और शिव-प्राप्ति हेतु कठोर तपस्या का वर्णन है।
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पार्वती का जन्म और तपस्या